वाक्य रचना
वाक्य रचना का अर्थ है जिसमें एक कर्ता, एक क्रिया और (आवश्यक होने पर) एक कर्म। संस्कृत में भी वाक्य-रचना का मूल ढाँचा सरल और तर्कसंगत है।
संस्कृत वाक्य का सामान्य क्रम है—
(कर्ता + कर्म + क्रिया)
(हालाँकि संस्कृत में शब्द-क्रम बदलने पर भी अर्थ स्पष्ट रहता है।)
वाक्य के तीन मुख्य अंग होते हैं—
(क) कर्ता: जो कार्य करता है, उसे कर्ता कहते हैं।
(ख) क्रिया: जो कार्य किया जाता है, वह कार्य ही क्रिया होता है।
(ग) कर्म: जिस पर कार्य प्रभाव पड़ता है, उसे कर्म कहते हैं।
जैसे—
- बालकः फलम् खादति। बालक फल खाता है।
- अहं विद्यालयं गच्छामि। मैं विद्यालय जाता हूँ।
बालक:, अहं → कर्ता
फलम्, विद्यालयं → कर्म
खादति, गच्छामि → क्रिया