अध्याय 4 – संस्कृत वाक्य रचना

वाक्य रचना

वाक्य रचना का अर्थ है जिसमें एक कर्ता, एक क्रिया और (आवश्यक होने पर) एक कर्म। संस्कृत में भी वाक्य-रचना का मूल ढाँचा सरल और तर्कसंगत है।

संस्कृत वाक्य का सामान्य क्रम है—

(कर्ता + कर्म + क्रिया)

(हालाँकि संस्कृत में शब्द-क्रम बदलने पर भी अर्थ स्पष्ट रहता है।)

वाक्य के तीन मुख्य अंग होते हैं—

(क) कर्ता: जो कार्य करता है, उसे कर्ता कहते हैं।

(ख) क्रिया: जो कार्य किया जाता है, वह कार्य ही क्रिया होता है।

(ग) कर्म: जिस पर कार्य प्रभाव पड़ता है, उसे कर्म कहते हैं।


जैसे—

  • बालकः फलम् खादति। बालक फल खाता है।
  • अहं विद्यालयं गच्छामि। मैं विद्यालय जाता हूँ।

बालक:, अहं → कर्ता

फलम्, विद्यालयं → कर्म

खादति, गच्छामि  → क्रिया

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