संस्कृत भाषा परिचय:-
संस्कृत विश्व की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है। “संस्कृत” शब्द का शाब्दिक अर्थ है — “परिष्कृत, शुद्ध और सुसज्जित भाषा”।
हिंदी, बांग्ला, मराठी और गुजराती जैसी अनेक भारतीय भाषाएं संस्कृत से ही उत्पन्न हुई हैं। यहाँ तक कि अंग्रेजी के शब्द जैसे Mother (मातृ), Father (पितृ) और Name (नाम) के मूल भी संस्कृत में ही निहित हैं। इसी कारण संस्कृत को “भाषाओं की जननी” कहा जाता है।
संस्कृत केवल कर्मकांड या पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। इसमें गणित, आयुर्वेद, दर्शन, राजनीति और खगोल विज्ञान का अगाध ज्ञान संचित है। आर्यभट्ट ने शून्य का सिद्धांत इसी भाषा में प्रतिपादित किया, महर्षि चरक ने चिकित्सा शास्त्र लिखा और कौटिल्य ने ‘अर्थशास्त्र’ की रचना की।
सीखने की प्रक्रिया कैसे आरंभ करें?
1. लिपि का ज्ञान
यदि आप हिंदी जानते हैं, तो आप देवनागरी लिपि से पूर्व परिचित हैं। आपको केवल उच्चारण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। संस्कृत की विशेषता यह है कि इसमें प्रत्येक वर्ण का उच्चारण सुनिश्चित है — जैसा लिखा जाता है, ठीक वैसा ही बोला जाता है। इसमें कोई अपवाद नहीं होता। प्रारंभिक चरण में उच्चारण सीखने के लिए विशेषज्ञों की सहायता या इंटरनेट (जैसे YouTube-Bhashapedia) का उपयोग करना श्रेयस्कर होगा।
2. शब्दावली
हिंदी भाषियों के लिए संस्कृत के शब्द अपरिचित नहीं होते। जल, वायु, अग्नि, गृह और नेत्र जैसे शब्द आप पहले से जानते हैं। प्रतिदिन पांच नए शब्द सीखने का संकल्प लें और उन्हें लघु वाक्यों में प्रयोग करने का प्रयास करें।
3. व्याकरण
संस्कृत का व्याकरण अत्यंत वैज्ञानिक और व्यवस्थित है। आरंभ में केवल चार मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें:
लिंग: (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसक लिंग)
वचन: (एकवचन, द्विवचन और बहुवचन)
पुरुष: (प्रथम पुरुष/अन्य पुरुष, मध्यम पुरुष और उत्तम पुरुष)
कारक: (वाक्य में शब्दों का परस्पर संबंध)
इन मूलभूत सिद्धांतों को समझने के पश्चात भाषा की संरचना स्पष्ट होने लगती है।
4. पठन का अभ्यास
व्याकरण की जटिलताओं में उलझने के बदले सरल साहित्य से प्रारम्भ करें। ‘हितोपदेश’ या ‘पंचतंत्र’ की कथाएं सर्वोत्तम हैं। पहले इनका हिंदी अनुवाद पढ़ें, फिर मूल संस्कृत श्लोकों को समझने का प्रयास करें। धीरे-धीरे अनुवाद पर आपकी निर्भरता समाप्त हो जाएगी।
संसाधन और माध्यम
पुस्तकें: ‘संस्कृत भारती’ की पुस्तकें व्यावहारिक संस्कृत सीखने के लिए उत्कृष्ट हैं। NCERT की पाठ्यपुस्तकें भी आधारभूत ज्ञान के लिए उपयोगी हैं। बिल्कुल प्रारम्भ से संस्कृत सीखने के लिए हमारे संस्था के द्वारा प्रकाशित (१) संस्कृत सिद्धि प्रारम्भिक स्तर और (२) संस्कृत सिद्धि उन्नत स्तर सर्वोत्तम है क्योंकी इसमें आप संस्कृत को बिल्कुल शुन्य से सीख सकते हैं।
इंटरनेट: YouTube पर अनेक शैक्षणिक चैनल उपलब्ध हैं। ‘learnsanskrit.cc’ जैसी वेबसाइटें और IIT बॉम्बे के निःशुल्क पाठ्यक्रम सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
संभाषण शिविर: ‘संस्कृत भारती’ द्वारा आयोजित 10 दिवसीय निःशुल्क संभाषण शिविर बोलने का अभ्यास करने का सबसे तीव्र मार्ग है।
समय सीमा
यदि आप प्रतिदिन 30 से 45 मिनट का समय देते हैं, तो एक वर्ष के भीतर आप सरल ग्रंथों को समझने में सक्षम हो सकते हैं। वेद और उपनिषदों जैसे गंभीर विषयों के लिए वर्षों के गहन अध्ययन की आवश्यकता होती है। किंतु जिस क्षण आप किसी श्लोक का अर्थ बिना किसी अनुवाद की सहायता के समझ लेते हैं, वह अनुभव अत्यंत संतोषजनक होता है।
निष्कर्ष
संस्कृत सीखना केवल एक भाषा का ज्ञान प्राप्त करना नहीं है, अपितु यह हजारों वर्षों के मानवीय चिंतन, विज्ञान और गौरवशाली साहित्य तक प्रत्यक्ष पहुँच प्राप्त करना है। यदि आप हिंदी जानते हैं, तो आप अपनी यात्रा का आधा मार्ग पहले ही तय कर चुके हैं।
(१) संस्कृत सिद्धि प्रारम्भिक स्तर और (२) संस्कृत सिद्धि उन्नत स्तर) पुस्तक के लिए हमें varidhisonu@gmail.com पर मेल अथवा 9304813876 पर वाट्सएप करें।
शुभमस्तु।